केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले सुनाते हुए कहा है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी, चाहे उनका पति ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर दीं हों। इस फैसले में जस्टिस कौसर एदाप्पगाथ ने एकल पीठ में सुनाया है और उन्होंने धार्मिक ग्रंथ कुरान की आयत 241 का हवाला देते हुए कहा है कि तलाकशुदा महिलाओं के भविष्य की आजीविका न्याय का मूल आधार है।