Record breaking cold: अंबिकापुर में ठंड ने तोड़ा पिछले 15 वर्ष का रिकॉर्ड, पारा पहुंचा 3.3 डिग्री

अंबिकापुर में गलने वाली तारह की बात करने को थोड़ी देर से ही पड़ी, लेकिन अब यहां न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह औसतन इतना ठंडा है कि पिछले 15 वर्षों में इस तरह की थंडक नहीं देखी गई।

जनवरी के पहले सप्ताह के लिए, यह तापमान 1986 से 2011 के बीच अधिक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे पहले कभी इतनी ठंडक न देखी गई थी। इस तरह की विरला घटना को अब तक की सबसे ठंडी (record breaking cold) माना जा रहा है।

जमीन पर तारह फंसने से लोग बेहद परेशान हैं, खासकर जब यह न्यूनतम तापमान पर होता है। इस तरह की ठंडक से सभी कामों और गतिविधियों में देरी आ गई है, और लोग अपने-अपने घरों में बैठे हुए ठंड का इंतजार कर रहे हैं।

इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है, खासकर जब वे अपने-अपने घरों से बाहर जाते थे। अब तो यहां शाम 5 बजे तक दिन रहता है, और इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है।
 
यह तारह पूरे भारत में इतनी खराब क्यों हुई? 🤔 मुझे लगता है कि यह तापमान बढ़ने से पहले हमें अपने जलवायु परिवर्तन को लेकर अधिक जागरूकता बनाए रखनी चाहिए। अगर हम तैयार नहीं हुए तो क्या उम्मीद है? ❄️
 
ठंड बहुत बढ़ गई, मैं अभी भी बाहर नहीं गया हूँ। घर से बाहर निकलने का मौका नहीं मिल रहा है, और यह 5 बजे तक दिन ही बनता है। क्या कुछ ऐसा है जिससे इससे पहले नहीं आयी थी?
 
🌨️ ऐसा लगता है कि पिछले 15 वर्षों में कोई भी शहर या क्षेत्र नहीं था जैसा अब अंबिकापुर हो। यह तारह इतनी ठंडी हुई है कि मुझे लगता है कि यहां लोग अभी भी गर्मियों की बात कर रहे हैं। 🤯 और इसका मतलब ये है कि हमें अपने घरों को और भी अच्छी तरह से बनाना चाहिए ताकि ठंडक ना ऐसी जैसी हो। कोई चीज़ कभी नहीं सुनिश्चित होती है, लेकिन हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। ❄️
 
यह तारह कितनी मुश्किल है ! 🌨️ गलने वाली तारह से हमें काफी परेशानी हो रही है, खासकर जब न्यूनतम तापमान इतना ठंडा होता है। लोग अपने-अपने घरों में बैठे हुए ठंड का इंतजार कर रहे हैं, और सब कामों में देरी आ गई है। 🕰️ शाम 5 बजे तक दिन भी चलना पड़ गया है , यह तो बहुत बड़ी परेशानी है ! 🤯
 
तारह फंसने की बात तो ही कुछ नहीं है इस समय की बात कर रहे हैं। यहां का तापमान इतना कम हो गया है कि मुझे भी घर पर बैठकर खाना खाने की फिकर है। ठंडक ने सब कामों को धीमा कर दिया है, और लोगों को अपने घरों में बैठे रहने की जरूरत है। शाम 5 बजे तक दिन ही नहीं होता, यह तो किसी भी तरह की ठंडक की परवाह किए बिना ही स्वीकार कर लेना चाहिए।
 
यार, ये तारह नीचे आ गयी है तो फिर क्या करेंगे। इतनी ठंड के साथ मैं भी अपने घर में बैठकर पीता जा रहा हूँ। लोगों को इतनी देर तक घर पर रहना पड़ रहा है, यह तो अच्छा नहीं है। और शाम 5 बजे तक दिन होना क्या है? इस तरह की ठंडक से मैंने पिछले अनुभव नहीं किया हूँ, लेकि अब कोई भी बाहर निकलकर कुछ करने का मन कर रहा है। तो फिर यह तारह हमें क्या सिखाती है?
 
तारह में जमीन फंसने से हमें यह सीखना चाहिए कि प्रकृति तुम्हारी बात नहीं समझती, इसलिए हमें उसकी निगरानी करनी चाहिए।
 
तारह फंसने की बात सुनकर मैं सोचता हूँ कि यह तो बहुत बड़ी समस्या है! 🌨️ सबसे ज्यादा मुझे लगता है कि लोगों के लिए यह ठंडक बहुत परेशान करने वाली है, खासकर जब वे अपने-अपने घरों से बाहर जाते हैं। तो इसके लिए हमें थोड़ा सोच-समझकर एक समाधान ढूंढना होगा।
 
ठंड की बात कर रहे हैं तो मुझे लगता है यार, यह तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस एकदम अनावश्यक है, चाहे हमारा गांव अंबिकापुर कहा ही को। ठंडक की समस्या तो न ही घरों में, न ही खेतों में, और न ही बाजारों में। बस किसी भी जगह पर जाने के लिए हमें अब पॉलीयूरेथेन सूट काटना पड़ता है, 😩 और यह तो आम तौर पर तारह की समस्या से भी बड़ी बात है। 🤯
 
बिल्कुल, तारह फंसने से तो हमें खुद को ढूंढना पड़ता है! 😂 6.3 डिग्री सेल्सियस तापमान इतना ठंडा है जैसे अगर तुम अपने पंखुड़ियों को फुलाकर बाहर निकलो, तो तारह तुम्हें पकड़ लेगी। लेकिन चिंता मत करो, तारह फंसने से हमें थोड़ा खेल मिलता है - घर की दीवार पर खड़े होकर, "मैं तो यहां से निकल नहीं पाऊँगा!" 😂
 
मेरे दोस्त, मुझे लगता है कि यह ठंड तो बहुत ज्यादा है! 6.3 डिग्री सेल्सियस तक निकलना कैसे संभव है? पिछले 15 सालों में कभी ऐसा नहीं देखा गया है। और जनवरी के पहले सप्ताह में यह तापमान 1986 से 2011 के बीच इतना ही है... लेकिन यह मतलब नहीं है कि इससे पहले कभी नहीं देखा गया था।

अब जब जमीन पर तारह फंस जाती है, तो लोगों को बहुत परेशानी होती है। खासकर जब न्यूनतम तापमान पर होती है... तो सबकामें देरी होती है और लोग अपने घरों में बैठे हुए ठंड का इंतजार कर रहे हैं। यह तो बहुत ही परेशान करने वाली स्थिति है! 🥶
 
तारह फंसने से हमारे जीवन में कई समस्याएं आ गई हैं। पहले तो यह तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, लेकिन ये औसतन इतना ठंडा नहीं है कि हमारे जीवन में देरी आ गई हो।

क्या हमें पता है कि जब तारह फंसती है, तो इसका मतलब कितनी परेशानियाँ होती हैं? जब जमीन पर तारह फंसती है, तो जीवन में देरी आ गई है। शाम 5 बजे तक दिन रह गया है और लोग अपने-अपने घरों से बाहर नहीं निकल पाए।
 
तारह फंसने से तो जरूर परेशान होता है 🤯, लेकिन इतनी ठंड 15 साल पहले भी नहीं देखी गई थी। जैसे ही सर्दी की बात आती है, मैं अपने रूम में सोने लग जाता हूँ। यह तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस, तो समझिए कि यह और ठंडा है 🥶। दिन 5 बजे तक रहता है, तो लोगों को घर पर ही रहना पड़ता है। बहुत से लोग अपने-अपने घरों में खाना पकाते हैं ताकि बाहर निकलने की जरूरत न हो। यह ठंड तो सबको पसंद नहीं आएगी, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक अच्छा अवसर है अपने घर को साफ करने और सोने के लिए आराम करने का।
 
ਤारह गलने वालੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਸੰਕट ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਜ਼ਮੀਨ 'ਤੇ ਫਸ ਕੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਬਹੁਤ ਧੁੱਖ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।
 
बड़े बड़े से यह तारह फंसने की बात तो मुझे अच्छी लगती है… खासकर जब यह तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो मुझे लगने लगा है कि ठंड का तो मेरे घर पर भी आने वाला है। लेकिन सच्चाई यह है कि जब तारह फंसती है और जमीन पर पड़ जाती है, तो पूरा शहर बेहद परेशान होता है। मैंने सुना है कि शाम 5 बजे तक दिन होना भी एक अजीब चीज है।
 
यह तो बहुत बड़ी बुराई है कि गलने वाली तारह जमीन पर फंस गई है 😵। अब हमें पूरे दिन घर में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जैसे कि बच्चे बड़े हो गए हैं और घर से बाहर निकलने में भी परेशानियाँ हो रही हैं। शाम 5 बजे तक दिन जा चुका है! यह तो बहुत अजीब है। क्या हमारे पास ठंडक कम करने का कोई तरीका नहीं है? मुझे लगता है कि हवाईयों पर फ्लाइट डेथ स्टॉक बढ़नी चाहिए, जिससे नौकरियां भी बन सकें।
 
तारह फंसने से हर किसी की जिंदगी बाधित हुई है 🌨️। मैं तो अभी भी सोच रहा हूं कि पिछले 15 वर्षों में इतनी ठंडक क्यों नहीं आई थी। यह बहुत ही अनोखी घटना है। मुझे लगता है कि हमें अपने घरों की जांच करनी चाहिए, ताकि हमारे बीच कहीं छेद ना हो जिस से तारह फंस रही हो। इसके अलावा, लोगों को ठंड का इंतजार करने के बजाय अपने-अपने घरों में आराम करें, और दिनभर काम करने के लिए छोटी-छोटी ब्रेक्स लेना चाहिए। तारह फंसने से हमें बहुत ही सावधान रहना चाहिए।
 
जी मैं तो अभी भी सोच रहा हूँ कि कहीं इतनी ठंड नहीं आ गई थी। 🤔
मैंने देखा है कि जमीन पर तारह फंसने से क्या होता है, और इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है।
अब शाम 5 बजे तक दिन रहता है, यह तो बहुत अजीब लग रहा है! 🌅
मैंने एक छोटी सी डाईग्राम बनाई है जिसमें दिखाया गया है कि जमीन पर तारह फंसने से क्या होता है।
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| जमीन पर |
| तारह |
| फंस जाती|
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मुझे लगता है कि सरकार और लोगों को मिलकर इस तरह की समस्या का समाधान ढूंढने की जरूरत है।
लोगों को अपने-अपने घरों में बैठे हुए ठंड का इंतजार करना अच्छा नहीं है, इसलिए सरकार को तुरंत कुछ करने की जरूरत है।
 
यार, मुझे भी ऐसा लगा है जैसे फ्रीजर की मालिश कर रहा हो! यह तापमान इतना कम आ गया है कि चिल्लने पर भी ठंडक महसूस नहीं होती। मैंने अपने बच्चों को भी बाहर निकलने से इनकार कर दिया है, अब वे सभी खेलते-खेलते घरों में ही रह जाएंगे। और शाम 5 बजे तक दिन?! यह तो किसी निशानबाज़ फिल्म की कहानी है!
 
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