अंबिकापुर में गलने वाली तारह की बात करने को थोड़ी देर से ही पड़ी, लेकिन अब यहां न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह औसतन इतना ठंडा है कि पिछले 15 वर्षों में इस तरह की थंडक नहीं देखी गई।
जनवरी के पहले सप्ताह के लिए, यह तापमान 1986 से 2011 के बीच अधिक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे पहले कभी इतनी ठंडक न देखी गई थी। इस तरह की विरला घटना को अब तक की सबसे ठंडी (record breaking cold) माना जा रहा है।
जमीन पर तारह फंसने से लोग बेहद परेशान हैं, खासकर जब यह न्यूनतम तापमान पर होता है। इस तरह की ठंडक से सभी कामों और गतिविधियों में देरी आ गई है, और लोग अपने-अपने घरों में बैठे हुए ठंड का इंतजार कर रहे हैं।
इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है, खासकर जब वे अपने-अपने घरों से बाहर जाते थे। अब तो यहां शाम 5 बजे तक दिन रहता है, और इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है।
जनवरी के पहले सप्ताह के लिए, यह तापमान 1986 से 2011 के बीच अधिक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे पहले कभी इतनी ठंडक न देखी गई थी। इस तरह की विरला घटना को अब तक की सबसे ठंडी (record breaking cold) माना जा रहा है।
जमीन पर तारह फंसने से लोग बेहद परेशान हैं, खासकर जब यह न्यूनतम तापमान पर होता है। इस तरह की ठंडक से सभी कामों और गतिविधियों में देरी आ गई है, और लोग अपने-अपने घरों में बैठे हुए ठंड का इंतजार कर रहे हैं।
इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है, खासकर जब वे अपने-अपने घरों से बाहर जाते थे। अब तो यहां शाम 5 बजे तक दिन रहता है, और इस तरह की ठंडक ने लोगों को बहुत परेशान किया है।